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Posted on 28/11/2025

राजकीय नेशनल महाविद्यालय सिरसा में श्री गुरु तेग बहादुर जी के 350वें शहीदी वर्ष के उपलक्ष्य में अर्थशास्त्र विभाग, अंग्रेजी विभाग, पंजाबी विभाग, आइक्यूएसी, शोध प्रकोष्ठ व महिला प्रकोष्ठ के संयुक्त संयोजन से श्री गुरु तेग बहादुर जी के दर्शन पर एक राष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया। इस अवसर आए हुए मेहमानों व प्रतिभागियों का स्वागत करते हुए महाविद्यालय के कार्यकारी प्राचार्य डॉ हरविंदर सिंह जी ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के दर्शन के बारे में बहुत विस्तार से बताया। इस सेमिनार में मुख्य वक्ता के रूप में श्री स्वर्ण सिंह विर्क एक प्रसिद्ध साहित्यकार और इतिहासकार ने शिरकत की। इन्होंने अपने वक्तव्य में श्री गुरु तेग बहादुर जी के पूरे जीवन के बारे में विस्तार से बताते हुए कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने सामाजिक न्याय, मानवाधिकारों की रक्षा और धार्मिक भेदभाव के विरोध में अपने प्राणों की आहुति दे दी। उन्होंने कहा कि श्री गुरु तेग बहादुर जी अपने शुरुआती जीवन से ही त्याग के प्रतीक रहे हैं। उन्होंने अपने वक्तव्य में आगे बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर जी ने बिहार, असम इत्यादि क्षेत्रों में अपना भ्रमण किया और उनका साहित्य अधिकतर ब्रज भाषा में लिखा गया है। सेमिनार के पहले तकनीकी स्तर में रिसोर्स पर्सन के रूप में चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय के पंजाबी विभाग से श्री गुरु साहिब सिंह ने अपने वक्तव्य में श्री गुरु तेग बहादुर जी के दर्शन की विभिन्न दृष्टिकोण से व्याख्या की। तीसरे तकनीकी स्तर और समापन व्याख्यान के लिए सेवानिवृत प्राचार्य श्री अशोक कुमार भाटिया जी ने शिरकत की। भाटिया साहब ने अपने व्याख्यान में श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन दर्शन की वर्तमान में प्रासंगिकता और आधुनिक मानवतावाद से उनकी तुलना करते हुए बताया कि श्री गुरु तेग बहादुर जी के दर्शन की वर्तमान में भी प्रासंगिकता है और आज का आधुनिक मानवतावाद श्री गुरु तेग बहादुर जी के मानवतावाद से दूर जाता हुआ दिखाई दे रहा है। आज हमें श्री गुरु तेग बहादुर जी के मानवतावाद से बहुत कुछ सीखने की जरूरत है। इस अवसर पर मंच का संचालन करते हुए सेमिनार की संगठन सचिव डॉ मीत ने भी श्री गुरु तेग बहादुर जी की वाणी में निहित दर्शन की वर्तमान में प्रासंगिकता विषय पर विस्तार से बताया। राष्ट्रीय सेमिनार के समापन पर सभी का धन्यवाद करते हुए श्री सुरेंद्र कुमार ने भी श्री गुरु तेग बहादुर जी के दर्शन में आर्थिक व सामाजिक न्याय के पक्ष का विवरण प्रस्तुत किया और बताया कि किस प्रकार विभिन्न सिद्धांतों में श्री गुरु तेग बहादुर जी के दर्शन देखने को मिलते हैं। इस सेमिनार में 100 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया और 70 प्रतिभागियों ने श्री गुरु तेग बहादुर जी के जीवन व विचारों से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर अपने शोध पेपर प्रस्तुत किए। इस अवसर पर साहित्यकार संपूर्ण सिंह धर्मसोत द्वारा लिखित उपन्यास लीहों लत्था प्यार का विमोचन किया गया।